अब जलील मत करो पूछकर यह भूचाल आता क्यों है। अब जलील मत करो पूछकर यह भूचाल आता क्यों है।
गुलों को खिलने को मिलती नहीं सरपरस्त जमीन की दलील है। गुलों को खिलने को मिलती नहीं सरपरस्त जमीन की दलील है।
घुंघरुओं की ताल पर छनक छनक नाचती है गरीबी! घुंघरुओं की ताल पर छनक छनक नाचती है गरीबी!
सामाजिक प्राणी हैं हम सब , हमसे ही निर्मित हो समाज । सामाजिक प्राणी हैं हम सब , हमसे ही निर्मित हो समाज ।
मेरे लिए देश सर्वोपरि है, मैं अपना व्यवहार क्रूर नहीं करता मेरे लिए देश सर्वोपरि है, मैं अपना व्यवहार क्रूर नहीं करता
तुम्हें पता है मैं तुम बिन कैसे जीता हूँ ? हाँ पल-पल खूं के आंसू रोता हूँ। तुम्हें पता है मैं तुम बिन कैसे जीता हूँ ? हाँ पल-पल खूं के आंसू रोता हूँ।